:
Breaking News

Tata Sons News: टाटा समूह में बढ़ा अंदरूनी तनाव, घाटे और IPO को लेकर नोएल टाटा-चंद्रशेखरन आमने-सामने

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

टाटा संस की अहम बोर्ड बैठक में समूह के बढ़ते घाटे, Air India और Tata Digital के प्रदर्शन तथा संभावित IPO को लेकर गंभीर चर्चा हुई। नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच मतभेद की खबरों ने कॉर्पोरेट जगत में हलचल बढ़ा दी है।

देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। नमक से लेकर स्टील, होटल, ऑटोमोबाइल, एयरलाइन और सॉफ्टवेयर तक फैले कारोबार वाले इस विशाल समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की हालिया बोर्ड बैठक ने कॉर्पोरेट जगत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुंबई स्थित ऐतिहासिक बॉम्बे हाउस में आयोजित इस बैठक में समूह के बढ़ते घाटे, नए व्यवसायों की वित्तीय स्थिति और संभावित आईपीओ जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार यह बैठक ऐसे समय में हुई जब टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। समूह के भीतर रणनीति, विस्तार और वित्तीय प्रबंधन को लेकर अलग-अलग राय सामने आने से कॉर्पोरेट हलकों में हलचल तेज हो गई है। खासकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच विचारों के अंतर को लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।

बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा के अलावा कई स्वतंत्र निदेशक और वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और किसी प्रकार की औपचारिक टिप्पणी नहीं की। इससे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया।

बताया जा रहा है कि टाटा समूह के नए और गैर-सूचीबद्ध कारोबारों में लगातार बढ़ रहे घाटे को लेकर बोर्ड में गंभीर चिंता जताई गई। वित्त वर्ष 2025 के दौरान समूह के अनलिस्टेड व्यवसायों का घाटा 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में यह नुकसान और तेजी से बढ़ सकता है।

इन घाटे वाले कारोबारों में सबसे ज्यादा चर्चा टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स वेंचर्स और एयर इंडिया को लेकर हो रही है। टाटा समूह ने हाल के वर्षों में डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश किया है। सुपर ऐप, ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के लिए अरबों रुपये लगाए गए, लेकिन अभी तक अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। दूसरी ओर एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद एयरलाइन सेक्टर में भी भारी निवेश किया जा रहा है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा है।

एयर इंडिया को दोबारा मजबूत ब्रांड बनाने के लिए टाटा समूह बड़े पैमाने पर विमान खरीद, सेवा सुधार और नेटवर्क विस्तार पर काम कर रहा है। हालांकि एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और परिचालन लागत के कारण कंपनी को अभी लाभ की स्थिति तक पहुंचने में समय लग सकता है। इसी वजह से बोर्ड बैठक में एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति भी प्रमुख मुद्दा बनी रही।

टाटा समूह के भीतर इस समय सबसे बड़ा विवाद संभावित आईपीओ को लेकर माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया है। नियामकीय नियमों के अनुसार ऐसी बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ सकता है। लेकिन खबरों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा आईपीओ को लेकर पूरी तरह सहज नहीं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा संस का आईपीओ आने से समूह की संरचना और नियंत्रण व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। चूंकि टाटा ट्रस्ट्स की कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए लिस्टिंग के बाद कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव की संभावना भी बढ़ सकती है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर समूह के भीतर अलग-अलग मत देखने को मिल रहे हैं।

उधर एन. चंद्रशेखरन पिछले कुछ वर्षों में टाटा समूह के विस्तार और आधुनिकीकरण की रणनीति पर तेजी से काम करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया, डिजिटल कारोबार में आक्रामक निवेश किया और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बड़ी योजनाएं शुरू कीं। लेकिन इन क्षेत्रों में शुरुआती निवेश का दबाव अब वित्तीय आंकड़ों में दिखाई देने लगा है।

कॉर्पोरेट जगत के जानकारों का मानना है कि टाटा समूह इस समय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। पारंपरिक कारोबारों में मजबूत स्थिति रखने वाला समूह अब नई अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्रों में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन बड़े निवेश और धीमी कमाई के कारण बोर्ड स्तर पर चिंता स्वाभाविक मानी जा रही है।

इन सबके बीच उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को समूह से जुड़े कुछ ट्रस्टों और संस्थाओं में शामिल किए जाने के बाद भविष्य की नेतृत्व संरचना को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि समूह की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में टाटा समूह के लिए सबसे बड़ी चुनौती नए व्यवसायों को मुनाफे में लाना और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना होगा। यदि डिजिटल, एयरलाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में लाभ नहीं बढ़ा तो समूह पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर यदि ये कारोबार सफल होते हैं तो टाटा समूह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में नई मिसाल भी कायम कर सकता है।

फिलहाल बॉम्बे हाउस में हुई यह बैठक केवल एक सामान्य बोर्ड मीटिंग नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे टाटा समूह के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक के रूप में देखा जा रहा है। नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच मतभेद की खबरों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में समूह के भीतर बड़े फैसले और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *